ON THE DOT
Tuesday, June 23, 2026
  • Headlines
  • Articles
  • Lifestyles
  • Stories
  • ON THE DOT TO
  • Hindi
  • About us
  • Contact
SUBSCRIBE
No Result
View All Result
  • Headlines
  • Articles
  • Lifestyles
  • Stories
  • ON THE DOT TO
  • Hindi
  • About us
  • Contact
No Result
View All Result
ON THE DOT
No Result
View All Result
Home Lifestyles

प्रतिभा का अवलोकन कर जिम्मेदारियां दें

by On The Dot
April 21, 2021
Reading Time: 1 min read
0 0
0
प्रतिभा का अवलोकन कर जिम्मेदारियां दें

Image Courtesy: Google

चैत्र नवरात्रि का आज अंतिम दिन है। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को रामनवमी मनायी जाती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, 21 अप्रैल की देर रात 12 बजकर 43 मिनट तक अष्टमी तिथि थी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो गई थी। जो कि 22 अप्रैल की देर रात 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी।

अपनी बात को आगे ले कर जाऊँ उससे पहले सृष्टी के प्रत्येक जीव को मेरे राम के जन्म दिन की बधाई। मेरे राम के जीवन से हम असीमित मूल्यवान प्रबंधन चीजें सीखी जा सकती हैं जैसे कि अपने साथियों को उनके गुणों के आधार पर जिम्मेदारियां देनी चाहिए। रामायण में श्रीराम वानर सेना के साथ दक्षिण दिशा में समुद्र किनारे पहुंच गए थे।

पूरी वानर सेना के साथ श्रीराम-लक्ष्मणजी को समुद्र पार करके लंका पहुंचना था। ये काम बहुत मुश्किल था। श्रीराम ने समुद्र देवता से निवेदन किया कि वे वानर सेना को निकलने के लिए रास्ता दें। तब समुद्र देव ने श्रीराम को नल-नील के बारे में बताया कि वे विश्वकर्माजी के पुत्र हैं। इन्हें ऋषियों ने शाप दिया था कि ये जो भी चीजें पानी में डालेंगे, वह डूबेगी नहीं। आप इनकी मदद से समुद्र पर सेतु बांध सकते हैं। इसके बाद श्रीराम ने नल-नील को समुद्र पर सेतु बांधने की जिम्मेदारी दी। कुछ ही समय पर नल-नील ने पत्थरों से समुद्र पर लंका तक सेतु बना दिया। जिसकी मदद से पूरी वानर सेना लंका पहुंच गई।

RELATED STORIES

Tofu Curry: A Perfect Blend of Health and Flavor

Tofu Curry: A Perfect Blend of Health and Flavor

June 23, 2026
Hanuman Chalisa: More Than a Hymn, a Guidebook for Life

Bada Mangal and the Dharma of Service: A Journey Beyond Community Feasts

June 23, 2026

जब श्रीराम वानर सेना के साथ लंका पहुंचे तो उन्होंने अंगद को दूत बनाकर रावण की सभा में भेजा था। रामजी चाहते तो हनुमानजी को भी दूत बनाकर भेज सकते थे, लेकिन उन्होंने इस काम के लिए अंगद को चुना। अंगद को लंका के दरबार में दूत बनाकर भेजने से रावण को समझ आ गया था कि श्रीराम की सेना में हनुमान ही नहीं, बल्कि अंगद जैसे भी कई और शक्तिशाली वानर हैं।

लंका आने से पहले अंगद का आत्मविश्वास कमजोर हो रहा था। अंगद ने माँ सीता की खोज में लंका आने से मना कर दिया था। तब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका पहुंचे थे और माँ सीता का पता लगाकर और लंका जलाकर श्रीराम के पास लौट आए थे। वानर सेना के साथ लंका पहुंचने के बाद अंगद को रावण के दरबार में दूत बनाकर भेजने से उसका आत्मविश्वास भी जाग गया था।

सीख – श्रीराम के इन प्रसंगों से हम समझ सकते हैं कि हमें अपने साथियों के गुणों को पहचानना चाहिए और साथियों की योग्यता पर भरोसा करना चाहिए। अगर किसी साथी का आत्मविश्वास कमजोर हो रहा है तो उसे प्रेरित करना चाहिए, उसका उत्साह बढ़ाना चाहिए।

-आदित्य तिक्कू

Tags: #aDITYa_TIKKU#Antardwand#Article#Ram Navami#Story #अंर्तद्वंद#Think_it#अंर्तद्वंद#आदित्य_तिक्कू#कहानी#रामनवमी#लेखसोचिये

2

  • Headlines
  • Articles
  • Lifestyles
  • Stories
  • ON THE DOT TO
  • Hindi
  • About us
  • Contact

© 2020 ON THE DOT

No Result
View All Result
  • Headlines
  • Articles
  • Lifestyles
  • Stories
  • ON THE DOT TO
  • Hindi
  • About us
  • Contact

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In